आइए जाने श्री गुरु जम्भेश्वर भगवान शब्दवाणी के बारे में | Shri Guru Jambheshwar Shabdvani

  आइए जाने श्री गुरु जम्भेश्वर भगवान शब्दवाणी के बारे में | Shri Guru Jambheshwar Shabdvaniश्री गुरु जम्भेश्वर भगवान शब्दवाणी: जाम्भोजी ने अपने जीवनकाल में अनेक शब्द कहे किन्तु अब 120 शब्द ही प्रचलन में हैं। जो वर्तमान में शब्दवाणी (जम्भवाणी) के नाम से जाने जाते हैं। जाम्भोजी के शब्द...

Shri Guru Jambheshwar Shabdvani Shabd 10

Shri Guru Jambheshwar Shabdvani Shabd 10ओ३म् विसमिल्ला रहमान रहीम, जिहिं कै सदकै भीना भीन।भावार्थ- विसमिल्ला तो रहम-दया भाव रखने वाले स्वयं विष्णु अवतारी राम ही है। उनका मार्ग तो तुम्हारे से भिन्न ही था। वर्तमान में तुमने जो जीव हत्या का मार्ग अपना रखा है यह तुम्हारा मनमुखी है। उनको बदनाम मत करो।तो...

Shri Guru Jambheshwar Shabdvani Shabd 9 | श्री गुरु जम्भेश्वर शब्दवाणी भावार्थ - शब्द 09

 Shri Guru Jambheshwar Shabdvani Shabd 9ओ३म् दिल साबत हज काबो नेड़ै, क्या उलबंग पुकारो। भावार्थ- यदि तुम्हारे दिल शुद्ध सात्विक विकार रहित है तो तुम्हारे काबे का हजा नजदीक ही है अर्थात् हृदय ही तुम्हारा काबै का हज है तो फिर क्यों मकानों की दिवारों पर चढ़कर ऊंची आवाज से उस अल्ला की पुकार करते...

Shri Guru Jambheshwar Shabdvani - Shabd 8 | श्री गुरु जम्भेश्वर शब्दवाणी भावार्थ : (शब्द 08)

Shri Guru Jambheshwar Shabdvani Shabd 8श्री गुरु जम्भेश्वर शब्दवाणी भावार्थ : (शब्द 08) (adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({});  ओझ्म् सुण रे काजी सुण रे मुल्ला, सुण रे बकर कसाई। भावार्थ- भावार्थ-बकरी आदि निरीह जीवों की हत्या करने वाले कसाई रूपी काजी, , मुल्ला तुम लोग मेरी...

श्री गुरु जम्भेश्वर शब्दवाणी भावार्थ - शब्द 07 |Shri Guru Jambheshwar Sabadvani - Sabad 7

Shri Guru Jambheshwar Sabadvani - Sabad 7श्री गुरु जम्भेश्वर शब्दवाणी भावार्थ (शब्द 07) (adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); ॐ हिन्दू होय कै हरि क्यूं न जंप्यों, कांय दहदिश दिल पसरायों।भावार्थ- हिन्दू होने का अर्थ है कि भगवान विष्णु से सम्बन्ध स्थापित करना। विष्णु निर्दिष्ट मार्ग का अनुसरण करना तथा विष्णु परमात्मा का अनुमान करना, तथा विष्णु परमात्मा का स्मरण करना। यदि हिन्दू होय...

श्री गुरु जम्भेश्वर शब्दवाणी (शब्द 67) || Shri Guru Jambheshwar Shabdvani (Shabd 67) || Bishnoism

 श्री गुरु जम्भेश्वर शब्दवाणी (शब्द 67) || Shri Guru Jambheshwar Shabdvani (Shabd 67) || Bishnoism सबद-67 (शुक्ल हंस) ओ३म श्री गढ़ आल मोत पुर पाटण भुंय नागोरी,म्हे ऊंडे नीरे अवतार लीयो। सरलार्थ:संसार के सभी गढ़ों में भगवान विष्णु का धाम वैकुण्ठ लोक सर्वश्रेष्ठ गढ़ है। उसी श्री गढ़...

श्री गुरु जम्भेश्वर शब्दवाणी (शब्द 06) || Shri Guru Jambheshwar Shabdvani (Shabd 06) || Bishnoism

श्री गुरु जम्भेश्वर शब्दवाणी (शब्द 06) || Shri Guru Jambheshwar Shabdvani (Shabd 06) || Bishnoism  श्री गुरु जम्भेश्वर शब्दवाणी शब्द: ०६ ओउम भवन भवन म्हें एका जोती, चुन चुन लिया रतना मोती। भावार्थ- सम्पूर्ण चराचर सृष्टि के कण-कण में परम तत्व रूप परब्रह्या की सामान्य ज्योति सर्वत्र...